
पूर्णिया: लोक आस्था एवं सूर्य उपासना के महापर्व छठ के दूसरे दिन रविवार को व्रतियों ने पूर्ण स्वच्छता, पवित्रता एवं नियमों का पालन किया। व्रती महिला-पुरुष सुबह से निर्जला साध्य समय अमरूद के दातुन से मुंह साफ के। उसके बाद नदी घाटों, तालाबों, तालाबों में स्नान-ध्यान किया गया।
कई व्रती घरों में ही पूरी पवित्रता से स्नान कर पीले और लाल वस्त्र धारण कर मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़, दूध व साठी के चावल का रसियाव और आटे के आटे की रोटी बनाई जाती है। इसके बाद सीजन फल का भोग लगाएं भगवान भास्कर और छठी मईया की।
छठ आस्था से भक्तिमय हुआ वातावरण
खरना के दौरान घर की महिलाओं ने छठ गीत व मांगलिक गीत गाया। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया। व्रती महिलाओं ने सूर्य देवता व छठी मैया के स्मरण के बाद धूप-दीप, अगर कपूर व अगरबती जलाई। उनका पर्यावरण प्रबंधन हो उठा. छठ महापर्व के गीत से रोम-रोम पवित्र हो गया।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य काल
व्रतियों के प्रसाद ग्रहण के बाद परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों के बीच भी खरना का प्रसाद ग्रहण किया गया। परिवार के सभी सदस्यों ने प्रसाद ग्रहण किया। घर से लेकर लैपटॉप और लैपटॉप में छठ गीत बजने से लोगों के अंदर आस्था का संचार हो गया। चार दिव्य अनुष्ठानों के तीसरे दिन गुरुवार को व्रती नदी घाट, तालाब, पोखरा, वंद में खड़े तीर के बीच में अस्ताचलगामी सूर्य बांस को अर्घ्य देगें।










