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पूर्णिया : कसबा में एनडीए और महागठबंधन के लिए राह आसान नहीं पनघट की, बागियों के बगाबत से आया बवंडर

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पूर्णिया: कसाबा विधानसभा क्षेत्र में वजीरों और पुतिन के बीच घमासन में टक्कर जारी है। साझीदारी को बढ़ावा देने के लिए भी विज्ञापन दिया गया है। यहां की यह सीट कांग्रेस के टिकट में दी गई है, जबकी एरे की सीट पर अंत समय में रिपब्लिकन (आर) के टिकट दिए गए हैं। यहां देखें यहां आकर्षक और स्टाइलिश में बागियों का हुजूम लगा है। यही बागी पोस्टर्स को दिखा रहे हैं। ऐसे में दोनों गठबंधनों के लिए राह आसान नहीं, पनघट की।

दोनों ने ही गठबंधन अनुमान के विपरित नए आवेदकों को रणक्षेत्र में उतार दिया है। पार्टी में लगातार हैट्रिक हैशटैग वाले नेता अफाक आलम को हांसी पर बजाते हुए नए चेहरे पूर्व प्रमुख कम्युनिस्ट अख्तर आलम को टिकट के मैदान में उतारा गया है। जबकि कॉन्स्टेंट हैट्रिक के बाद चौथी बार जीत दर्ज करने वाले अफाक आलम स्टूडियो के कवर ग्राउंड में है। जो कांग्रेस की राह को मुश्किल बना रही है। कांग्रेस के इस मुश्किल को बढ़ाने में इमाम भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

वक्ष की नाव भी बीच मझधार में दिख रही है। पिछले चुनाव में हम इसी सीट पर बैठे थे। पार्टी ने इस सीट से हम के अविजित राजदंड यादव को मैदान में उतारा और तीसरे नंबर पर रहे। जबकि बीजेपी के पूर्व नेता प्रदीप कुमार दास रिपब्लिक (आर) मैदान में उतर कर खेल रहे थे. प्रदीप कुमार दास दूसरे स्थान पर रह रहे थे।
पूर्व सहयोगी प्रदीप दास की भाजपा में वापसी के बाद यहां से उन्हें मैदान में विश्वास का भी सहारा मिला। लेकिन ऐन मॉक पर सीट रैक (आर) के टोक में चला गया। ऐसे में हम के राजेंद्र यादव और प्रदीप कुमार दास भी इंजिनियरिंग के मैदान में उतर गए।
यहां से नितेश कुमार सिंह को मैदान में उतारा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि नितेश कुमार सिंह चुनाव से पूर्व कसबा की राजनीति में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे थे. इसके कलाकारों के अन्य घटक सिद्धांत और नेता वर्षों से मौजूद हैं।

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Author: pankaj jha

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