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प्रयागराज: इस मंदिर में लेट कर भक्तों पर आशिष बरसाते हैं हनुमान,अकबर भी नहीं हिला सके प्रतिमा

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HanumanTample Prayagraj : उत्तरप्रदेश के प्रयागराज संगम पर इन दिनों माघ मेला लगा है.यहां हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु संगम स्नान करने पहुंच रहे हैं. संगम के पास ही हनुमान जी का एक अद्भूत मंदिर है, मान्यता है कि इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन के बिना संगम स्नान निष्फल माना जाता है. यही कारण है कि संगम स्नान के बाद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है.ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस मंदिर की क्या विशेषता है? इसके पीछे क्या रहस्य और कहानी है, जानते हैं-
यहां लेटे हुए मुद्रा में है हनुमान जी
प्रयागराज के संगम स्थिति हनुमान जी को कई नामों से भी जाना जाता है. इन्हें बड़े हनुमान जी, किले वाले हनुमान जी, लेटे हनुमान जी और बांध वाले हनुमान जी कहा जाता है. यहां जमीन से नीचे हनुमान जी की मूर्ति लेटे हुए मुद्रा में है तथा हनुमान जी अपनी एक भुजा से अहिरावण और दूसरी भुजा से दूसरे राक्षस को पकड़े हुए हैं। कहते हैं कि ये एक एकमात्र मंदिर है जहां हनुमान जी लेटे हुए हैं.
व्यापारी को दिया सपना
एक कहानी के अनुसार सैकड़ों वर्ष पूर्व एक धनी व्यापारी हनुमान जी की इस मूर्ति को लेकर जा रहा था.उसी समय उसकी नाव संगम के तट पर पहुंची और हनुमान जी की मूर्ति में गिर गई. इस व्यापारी ने हनुमान जी की मूर्ति उठाने की तमाम कोशिशें की लेकिन कोई सफलता नहीं मिली, तब उसे हनुमान जी ने एक रात सपना दिया और कहा वे इस संगम पर ही रहना चाहते हैं.
अकबर भी नहीं हिला सके मूर्ति
बताते हैं कि 1582 में अकबर अपने साम्रज्य को विस्तार देने में जब व्यस्त था तो वो इधर भी आया था. मंगध, अवध, बंगाल सहित पूर्वी भारत में चलने वाले विद्रोह को शांत करने के लिए अकबर ने यहां एक किले का निर्माण कराया, जहां पर अकबर हनुमान जी को ले जाना चाहता था. उसने मूर्ति को हटाने की कोशिश की, लेकिन मूर्ति अपने स्थान से हिली भी नहीं. कहते हैं उसी समय हनुमान जी ने अकबर को सपना दिया. इसके बाद अकबर ने इस काम को रोक दिया और हनुमान जी से अपनी हार मान ली और तौबा कर ली.
20 फीट लंबी है हनुमान जी की मूर्ति
हनुमान जी की इस मूर्ति की लंबाई लगभग 20 फीट की है. मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान भक्तों की यहां भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि गंगा का पानी, भगवान हनुमान जी का स्पर्श करता है और उसके बाद गंगा का पानी उतर जाता है. ये हनुमान जी का सिद्ध मंदिर है. कहते हैं कि हनुमान जी अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते हैं. यहां आने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हर संकटों से मुक्ति मिलती है.

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Author: sanvaadsarthi

संपादक

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